Wednesday, August 20, 2014

चिरैया एक सोयी थी, मीठी मीठी नींद में,


चिरैया एक सोयी थी,
मीठी मीठी नींद में,
देख रही थी सपने,
देश एक अनजाने के ||
मुड़ी तुड़ी सी थी चिरैया,
घेरा था घना सुरक्षा का,
आँखें अभी खुली भी ना थी,
बस महसूस होता था उसे,
माँ की ममता की गर्माहट ||
जिस से जीवन बना था उसका,
भूल में थी भोली चिरैया,
जीवन ना था सुरक्षित उसका,
जा पंहुचा दानव फिर एक||
इरादे नही थे जिसके नेक़,
सहम गयी नन्ही चिरैया,
ये सब तो ना होना था,
खेलना था बाबा के संग,
माँ की गोदी सोना था ||
दानव ने कर डाले कितने ही टुकड़े,
उस आत्मा और शरीर के,
खून कर दिया उस जीवन का,
जिसने जीवन देखा ही ना था ||
मर गया एक बीज,
वृक्ष बनने से पहले,
सो गयी मौत की नींद चिरैया ,

आँखे खोलने से पहले ||

2 comments:

"नेह्दूत" said...

दिल कौ छूती मार्मिक रचना...

Unknown said...

शुक्रिया नेह्दूत